LIVE UPDATE

पेंड्रा/कोटमी: गौमाता सम्मान, सुरक्षा और संवैधानिक दर्जे की मांग को लेकर गौसेवकों का ज्ञापन

देशी गोवंश को “राष्ट्रमाता/राष्ट्र आराध्या” का संवैधानिक दर्जा दिया जाए

पेड्रा/कोटमी, 27 अप्रैल 2026 (सोमवार): गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सकोला तहसील क्षेत्र में गौसेवकों द्वारा गौमाता के सम्मान, सेवा और सुरक्षा को लेकर एक व्यापक सामाजिक व धार्मिक पहल की गई। “गौमाता सम्मान आह्वान अभियान” के तहत क्षेत्र के गौसेवकों और ग्रामीणों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन प्रतिनिधियों के नाम ज्ञापन सौंपते हुए गोवंश संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

यह ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सकोला तहसीलदार को सौंपा गया। ज्ञापन तहसील प्रभारी चेतराम प्रजापति के नेतृत्व में क्षेत्रीय गौसेवकों द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे तहसील कार्यालय में कानूनगो अधिकारी आर.एन. रजक ने प्राप्त किया।

मुख्य मांगें

ये खबर भी पढ़ें…
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- सुशासन की सरकार में अवैध उगाही का खेल! रुमगा में हर ट्रैक्टर से ₹200 वसूली का आरोप, आशीष पड़वार का नाम आया सामने; आखिर किसके संरक्षण में चल रहा वसूली का कारोबार?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- सुशासन की सरकार में अवैध उगाही का खेल! रुमगा में हर ट्रैक्टर से ₹200 वसूली का आरोप, आशीष पड़वार का नाम आया सामने; आखिर किसके संरक्षण में चल रहा वसूली का कारोबार?
November 3, 2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी व्यवस्था के दावों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के रुमगा क्षेत्र से कथित अवैध वसूली...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

ज्ञापन में गौसेवकों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 और 51A(g) की भावना के अनुरूप निम्न प्रमुख मांगें रखीं—

* देशी गोवंश को “राष्ट्रमाता/राष्ट्र आराध्या” का संवैधानिक दर्जा दिया जाए

ये खबर भी पढ़ें…
गौरेला पेंड्रा मरवाही -जुलाई में बने मरवाही के तहसीलदार, मई में ही कर दिया शिकायत का निराकरण! जमीन मामले में तारीखों का ऐसा खेल, सरकारी दस्तावेजों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल!
गौरेला पेंड्रा मरवाही -जुलाई में बने मरवाही के तहसीलदार, मई में ही कर दिया शिकायत का निराकरण! जमीन मामले में तारीखों का ऐसा खेल, सरकारी दस्तावेजों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल!
November 4, 2026
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में सरकारी आदेशों और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

* केंद्र स्तर पर “गोसेवा मंत्रालय” की स्थापना की जाए

* गोवंश संरक्षण, सेवा और सुरक्षा के लिए एकीकृत केंद्रीय कानून बनाया जाए

* छत्तीसगढ़ में गोवंश वध पर पूर्ण प्रतिबंध हेतु कठोर कानून लागू हो

* राज्य में “राज्य माता” का दर्जा देकर केंद्र को “राष्ट्रमाता” के रूप में मान्यता हेतु अनुशंसा भेजी जाए

* गो आधारित अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा दिया जाए

गोवंश की वर्तमान स्थिति पर चिंता

ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में देशी गोवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। तस्करी, अवैध वध, सड़कों पर भटकते पशु और प्लास्टिक सेवन जैसी समस्याओं के कारण गोवंश तेजी से घट रहा है। स्वतंत्रता के समय प्रति व्यक्ति 10 गोवंश की उपलब्धता थी, जो आज घटकर प्रति 10 व्यक्तियों पर 1 गोवंश तक पहुंच गई है।

गौसेवकों ने कहा कि गोवंश केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में गो आधारित प्राकृतिक खेती किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्चक्र से मुक्त कर आत्मनिर्भर और स्वस्थ बना सकती है।

छत्तीसगढ़िया अस्मिता से जुड़ा मुद्दा

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान गौमाता के सम्मान, सेवा और संरक्षण से गहराई से जुड़ी हुई है। गोवंश का संरक्षण न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और जनस्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

सामाजिक अभियान में सहभागिता

इस अभियान में क्षेत्र के अनेक गौसेवक, किसान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रमुख रूप से चेतराम प्रजापति, आशीष श्रीवास्तव, चौथराम टांडिया, रामकेवल कैवर्त, प्रकाश सिंह, जगदीश सिंह, सीताराम कैवर्त, निखिल परिहार, पं. बलराम तिवारी, राम सिंह पोर्ते, मैकू सिंह पेंद्रो, राणा प्रताप मरावी, नीलचंद पुरी, शिवकुमार यादव, उत्तम राय सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

गौसेवकों ने आशा जताई कि केंद्र और राज्य सरकार इस विषय की गंभीरता को समझते हुए गोवंश संरक्षण, संवर्धन और सम्मान के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएंगी। उनका कहना है कि “आत्मनिर्भर भारत” का सपना तभी साकार होगा, जब किसान गो आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनाकर स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *